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bhagavat 10.45.20: तत्पश्चात्, हे महान् राजा परीक्षित! देवकी-पुत्र भगवान् कृष्ण भगवान् बलराम के साथ नन्द महाराज के पास पहुँचे। दोनों प्रभावशाली भगवान् ने उनका आलिंगन किया और उनसे इस प्रकार कहा।   |   bhagavat अध्याय 10.45: कृष्ण द्वारा अपने गुरु-पुत्र की रक्षा   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 45: कृष्ण द्वारा अपने गुरु-पुत्र की रक्षा  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  10.45.20 
अथ नन्दं समसाद्य भगवान् देवकीसुत: ।
सङ्कर्षणश्च राजेन्द्र परिष्वज्येदमूचतु: ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, हे महान् राजा परीक्षित! देवकी-पुत्र भगवान् कृष्ण भगवान् बलराम के साथ नन्द महाराज के पास पहुँचे। दोनों प्रभावशाली भगवान् ने उनका आलिंगन किया और उनसे इस प्रकार कहा।
 
Thereafter, O great King Parīkṣit, Lord Kṛṣṇa, the son of Devākī, accompanied by Lord Balarāma, approached Nanda Mahārāja. The two great ones embraced Him and spoke to Him as follows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)