Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 10.45.2: सात्वतों में महानतम भगवान कृष्ण अपने बड़े भाई के साथ अपने माता-पिता के पास पहुँचे। उन्होंने उन्हें विनम्रतापूर्वक अपना सिर झुकाकर और सम्मानपूर्वक "हे माँ" और "हे पिताजी" कहकर प्रसन्न किया और इस प्रकार बोले।   |   bhagavat अध्याय 10.45: कृष्ण द्वारा अपने गुरु-पुत्र की रक्षा   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 45: कृष्ण द्वारा अपने गुरु-पुत्र की रक्षा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  10.45.2 
उवाच पितरावेत्य साग्रज: सात्वतर्षभ: ।
प्रश्रयावनत: प्रीणन्नम्ब तातेति सादरम् ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
सात्वतों में महानतम भगवान कृष्ण अपने बड़े भाई के साथ अपने माता-पिता के पास पहुँचे। उन्होंने उन्हें विनम्रतापूर्वक अपना सिर झुकाकर और सम्मानपूर्वक "हे माँ" और "हे पिताजी" कहकर प्रसन्न किया और इस प्रकार बोले।
 
Lord Krishna, the greatest of the Satvatas, went to his parents along with his elder brother. He pleased them by humbly bowing his head and respectfully addressing them as “O Mother” and “O Father” and spoke thus.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)