Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.45.15-16: इसके बाद भगवान ने अपने सभी नजदीकी परिवार के सदस्यों और अन्य रिश्तेदारों को उन विभिन्न स्थानों से वापस बुलाया, जहाँ वे कंस के डर से भाग गए थे। उन्होंने यदुओं, वृष्णियों, अंधकों, मधुओं, दाशार्हों, कुकुरों और अन्य जाति-पक्ष वालों को सम्मानपूर्वक बुलाया और उन्हें सांत्वना भी दी क्योंकि वे विदेशी स्थानों में रहते-रहते थक चुके थे। तत्पश्चात् ब्रह्मांड के रचयिता भगवान कृष्ण ने उन्हें उनके अपने घरों में फिर से बसाया और बहुमूल्य उपहारों से उनका सत्कार किया। | bhagavat अध्याय 10.45: कृष्ण द्वारा अपने गुरु-पुत्र की रक्षा । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सर्वान्स्वान्ज्ञतिसम्बन्धान्दिग्भ्य: कंसभयाकुलान् ।
यदुवृष्ण्यन्धकमधुदाशार्हकुकुरादिकान् ॥ १५ ॥
सभाजितान् समाश्वास्य विदेशावासकर्शितान् ।
न्यवासयत् स्वगेहेषु वित्तै: सन्तर्प्य विश्वकृत् ॥ १६ ॥
अनुवाद
इसके बाद भगवान ने अपने सभी नजदीकी परिवार के सदस्यों और अन्य रिश्तेदारों को उन विभिन्न स्थानों से वापस बुलाया, जहाँ वे कंस के डर से भाग गए थे। उन्होंने यदुओं, वृष्णियों, अंधकों, मधुओं, दाशार्हों, कुकुरों और अन्य जाति-पक्ष वालों को सम्मानपूर्वक बुलाया और उन्हें सांत्वना भी दी क्योंकि वे विदेशी स्थानों में रहते-रहते थक चुके थे। तत्पश्चात् ब्रह्मांड के रचयिता भगवान कृष्ण ने उन्हें उनके अपने घरों में फिर से बसाया और बहुमूल्य उपहारों से उनका सत्कार किया।
Thereafter, the Lord brought back all His close family and other relatives from the various places where they had fled in fear of Kamsa. He respectfully called the Yadus, Vrishnis, Andhakas, Madhus, Dasharhas, Kukuras, etc. and also consoled them as they were tired of living in foreign places. Thereafter, Lord Krishna, the Creator of the universe, resettled them in their own homes and honored them with valuable gifts.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥