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bhagavat 10.45.12: इस प्रकार अपनी माता और पिता को सान्त्वना देते हुए और देवकी के पुत्र के रूप में प्रकट होकर, भगवान् ने अपने नाना उग्रसेन को यदुओं का राजा बना दिया।   |   bhagavat अध्याय 10.45: कृष्ण द्वारा अपने गुरु-पुत्र की रक्षा   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 45: कृष्ण द्वारा अपने गुरु-पुत्र की रक्षा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  10.45.12 
एवमाश्वास्य पितरौ भगवान्देवकीसुत: ।
मातामहं तूग्रसेनं यदूनामकरोन्नृपम् ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अपनी माता और पिता को सान्त्वना देते हुए और देवकी के पुत्र के रूप में प्रकट होकर, भगवान् ने अपने नाना उग्रसेन को यदुओं का राजा बना दिया।
 
Having thus consoled His parents and appeared as the son of Devaki, the Lord made His maternal grandfather Ugrasena the king of the Yadavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)