Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 10.45.11: भगवान के ऊपर आँसुओं की धार बहाते हुए, स्नेह की रस्सी से बँधे उनके माता-पिता कुछ बोल नहीं पाए। हे राजन्, वे भावुक थे और उनके गले आँसुओं से रुंध गए थे।   |   bhagavat अध्याय 10.45: कृष्ण द्वारा अपने गुरु-पुत्र की रक्षा   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 45: कृष्ण द्वारा अपने गुरु-पुत्र की रक्षा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  10.45.11 
सिञ्चन्तावश्रुधाराभि: स्‍नेहपाशेन चावृतौ ।
न किञ्चिदूचतू राजन्बाष्पकण्ठौ विमोहितौ ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान के ऊपर आँसुओं की धार बहाते हुए, स्नेह की रस्सी से बँधे उनके माता-पिता कुछ बोल नहीं पाए। हे राजन्, वे भावुक थे और उनके गले आँसुओं से रुंध गए थे।
 
Bound by the rope of affection, shedding torrents of tears upon the Blessed One, His parents could not speak. O King, they were overwhelmed with emotion and their throats were choked with tears.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)