श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर बताते हैं कि जना शब्द का यहां "भक्त" के रूप में अनुवाद किया जा सकता है, जैसा कि छंद में है दीयमानं न गृह्णन्ति बिना मत-सेवनं जनः (भाग। 3.29.13)। वे आगे बताते हैं कि जना का अनुवाद "माता-पिता" के रूप में भी किया जा सकता है, क्योंकि जना क्रिया जन से ली गई है, जिसका हिंसक रूप (जन्मते) का अर्थ है "उत्पन्न करना या जन्म देना।" शब्द के इस अर्थ में (जैसे जन्मनी या जनाकौ में), जना-मोहिनी शब्द इंगित करता है कि भगवान अपनी आंतरिक भ्रामक शक्ति का विस्तार करने जा रहे थे ताकि वसुदेव और देवकी उन्हें फिर से अपने प्यारे बच्चे के रूप में प्यार करेंगे।
