फूलों की माला से प्रहार करने पर जिस प्रकार हाथी को कुछ नहीं होता, उसी प्रकार असुर के प्रचंड वारों से भी विचलित न होते हुए भगवान् कृष्ण ने चाणूर की भुजाओं को पकड़कर कई बार उसे घुमाया और उसे ज़ोर से पृथ्वी पर पटका। उसके कपड़े, बाल और माला बिखर गए और वह पहलवान पृथ्वी पर गिरकर मर गया, मानो कोई विशाल उत्सव-स्तंभ गिर पड़ा हो।
Just as an elephant is in no way affected by hitting it with a flower garland, similarly, Lord Krishna, unperturbed by the powerful blows of the demon, held Chanur's arms, turned him around several times and threw him on the ground with great force. His clothes, hair and garland scattered and the wrestler fell to the ground dead as if a huge festival pillar had fallen.
तात्पर्य
श्रील श्रीधर स्वामी इंद्र ध्वज शब्द के अर्थ फ़रमाते हुए कहते हैं :- “बंगाल में एक विशेष उत्सव के अवसर पर लोग एक व्यक्ति के आकार का लम्बा खम्भा गाड़ते हैं और उसमें झण्डे, पताका आदि सजाते हैं। जैसे वह खम्भा गिर जाता है, उसी प्रकार वह [चानूर] भी गिरा”।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥