भगवद्गात्रनिष्पातैर्वज्रनीष्पेषनिष्ठुरै: ।
चाणूरो भज्यमानाङ्गो मुहुर्ग्लानिमवाप ह ॥ २० ॥
अनुवाद
भगवान के अंगों से निकलने वाले प्रचंड प्रहार चाणूर पर वज्रपात की तरह लग रहे थे, जिससे उसके शरीर का अंग-प्रत्यंग चूर-चूर हो रहा था और उसे निरंतर दर्द और थकान महसूस हो रही थी।
The harsh blows from the Lord's limbs were like thunderbolts on Chanur, shattering every part of his body and causing him more and more pain and fatigue.
तात्पर्य
चणूर की कोहनियां, बाजू, घुटने और बाकी अंगों में भी शक्ति रह नहीं गई थी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥