श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 43: कृष्ण द्वारा कुवलयापीड हाथी का वध  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  10.43.8 
पुच्छे प्रगृह्यातिबलं धनुष: पञ्चविंशतिम् ।
विचकर्ष यथा नागं सुपर्ण इव लीलया ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
तदनंतर भगवान श्रीकृष्ण जी ने बलवान कुवलयापीड की पूंछ को पकड़ लिया और खेल-खेल में पच्चीस धनुष-दूरी तक घसीटा, बिल्कुल उसी तरह जैसे गरुड़ किसी सांप को घसीटते हैं।
 
Then Lord Krishna caught the mighty Kuvalayapeeda by his tail and playfully dragged him for a distance of twenty-five dhanushas, ​​just as Garuda drags a serpent.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)