Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.43.40: अतः तुम दोनों को बलवान पहलवानों से लड़ना चाहिए। इसमें निश्चित ही कोई अनैतिकता नहीं है। हे वृष्णि-वंशी, तुम अपना पराक्रम मुझ पर प्रदर्शित कर सकते हो और बलराम, मुष्टिक के साथ लड़ सकता है। | bhagavat अध्याय 10.43: कृष्ण द्वारा कुवलयापीड हाथी का वध । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्माद्भवद्भ्यां बलिभिर्योद्धव्यं नानयोऽत्र वै ।
मयि विक्रम वार्ष्णेय बलेन सह मुष्टिक: ॥ ४० ॥
अनुवाद
अतः तुम दोनों को बलवान पहलवानों से लड़ना चाहिए। इसमें निश्चित ही कोई अनैतिकता नहीं है। हे वृष्णि-वंशी, तुम अपना पराक्रम मुझ पर प्रदर्शित कर सकते हो और बलराम, मुष्टिक के साथ लड़ सकता है।
Therefore, both of you should fight with powerful wrestlers. There is certainly nothing unjust in this. O Vrishni-descendant, you can test your prowess on me and Balarama can fight with Mushtika.
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध दस के अंतर्गत तैंतालीसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥