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श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 43: कृष्ण द्वारा कुवलयापीड हाथी का वध  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  10.43.36 
तन्निशम्याब्रवीत्कृष्णो देशकालोचितं वच: ।
नियुद्धमात्मनोऽभीष्टं मन्यमानोऽभिनन्द्य च ॥ ३६ ॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर भगवान कृष्ण जिन्हें कुश्ती से प्रेम था और इस चुनौती से खुश थे, ने समय और स्थान के अनुसार यह उत्तर दिया।
 
Hearing this, Lord Krishna, who wanted to wrestle and welcomed the challenge, said this as per the time and place.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)