Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.43.15: मृत हाथी को वहीं छोड़कर भगवान कृष्ण हाथी का दाँत लिए हुए अखाड़े में प्रवेश कर गए। कंधे पर हाथी का दाँत रखे हुए, उस हाथी के खून और पसीने की बूँदों के छींटे उनके शरीर पर पड़े थे और उनके पसीने की छोटी-छोटी बूँदों से उनका कमल जैसा मुख आच्छादित था। इस रूप में कृष्ण बहुत ही सुंदर लग रहे थे। | bhagavat अध्याय 10.43: कृष्ण द्वारा कुवलयापीड हाथी का वध । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मृत हाथी को वहीं छोड़कर भगवान कृष्ण हाथी का दाँत लिए हुए अखाड़े में प्रवेश कर गए। कंधे पर हाथी का दाँत रखे हुए, उस हाथी के खून और पसीने की बूँदों के छींटे उनके शरीर पर पड़े थे और उनके पसीने की छोटी-छोटी बूँदों से उनका कमल जैसा मुख आच्छादित था। इस रूप में कृष्ण बहुत ही सुंदर लग रहे थे।
Leaving the dead elephant there, Lord Krishna entered the arena holding the elephant's tusk. With the elephant's tusk on his shoulder, his body splattered with the elephant's blood and sweat, and his lotus-faced face covered with tiny drops of his own sweat, the Lord looked extremely graceful.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥