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bhagavat 10.43.12: हाथीराज कुवलयापीड के पराक्रम के विफल हो जाने पर वो निराशा से भरे गुस्से में भर उठा। लेकिन उसके महावत ने उसे अंकुश मारा और कुवलयापीड फिर से क्रोधित होकर कृष्ण पर चढ़ाई कर दी।   |   bhagavat अध्याय 10.43: कृष्ण द्वारा कुवलयापीड हाथी का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 43: कृष्ण द्वारा कुवलयापीड हाथी का वध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  10.43.12 
स्वविक्रमे प्रतिहते कुञ्जरेन्द्रोऽत्यमर्षित: ।
चोद्यमानो महामात्रै: कृष्णमभ्यद्रवद् रुषा ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
हाथीराज कुवलयापीड के पराक्रम के विफल हो जाने पर वो निराशा से भरे गुस्से में भर उठा। लेकिन उसके महावत ने उसे अंकुश मारा और कुवलयापीड फिर से क्रोधित होकर कृष्ण पर चढ़ाई कर दी।
 
When the heroism of Hastiraj Kuvalayapeed proved futile, he was filled with anger due to disappointment. But the mahout hit him with the goad and he once again attacked Krishna in anger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)