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श्लोक 10.42.8  |
सा तदर्जुसमानाङ्गी बृहच्छ्रोणिपयोधरा ।
मुकुन्दस्पर्शनात् सद्यो बभूव प्रमदोत्तमा ॥ ८ ॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान मुकुंद के स्पर्श से ही त्रिवक्रा अचानक एक अत्यंत सुंदर स्त्री में बदल गई जिसके अंग पूर्ण और सम-अनुपात वाले थे तथा नितम्ब और स्तन बड़े-बड़े थे। |
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| भगवान मुकुंद के स्पर्श से ही त्रिवक्रा अचानक एक अत्यंत सुंदर स्त्री में बदल गई जिसके अंग पूर्ण और सम-अनुपात वाले थे तथा नितम्ब और स्तन बड़े-बड़े थे। |
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