श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 42: यज्ञ के धनुष का टूटना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  10.42.8 
सा तदर्जुसमानाङ्गी बृहच्छ्रोणिपयोधरा ।
मुकुन्दस्पर्शनात् सद्यो बभूव प्रमदोत्तमा ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान मुकुंद के स्पर्श से ही त्रिवक्रा अचानक एक अत्यंत सुंदर स्त्री में बदल गई जिसके अंग पूर्ण और सम-अनुपात वाले थे तथा नितम्ब और स्तन बड़े-बड़े थे।
 
भगवान मुकुंद के स्पर्श से ही त्रिवक्रा अचानक एक अत्यंत सुंदर स्त्री में बदल गई जिसके अंग पूर्ण और सम-अनुपात वाले थे तथा नितम्ब और स्तन बड़े-बड़े थे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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