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श्लोक 10.42.7  |
पद्भ्यामाक्रम्य प्रपदे द्व्यङ्गुल्युत्तानपाणिना ।
प्रगृह्य चिबुकेऽध्यात्ममुदनीनमदच्युत: ॥ ७ ॥ |
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| अनुवाद |
| अपने दोनों चरणों से उसके पैर के अंगूठों को दबाते हुए भगवान विष्णु ने अपने दोनों हाथों की एक-एक उँगली उसकी ठुड्ढी के नीचे रखी और उसके शरीर को सीधा कर दिया। |
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| अपने दोनों चरणों से उसके पैर के अंगूठों को दबाते हुए भगवान विष्णु ने अपने दोनों हाथों की एक-एक उँगली उसकी ठुड्ढी के नीचे रखी और उसके शरीर को सीधा कर दिया। |
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