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bhagavat 10.42.28-31: जब उसने अपनी परछाईं देखी तो उसमें वो अपना सिर नहीं देख पाया; किसी कारण चांद और तारे दुगुने दिखने लगे; उसे अपनी परछाई में एक छेद दिखा; उसे अपनी जान की आवाज सुनाई नहीं दी; पेड़ सुनहरे रंग से ढके हुए दिखे; और वह अपने पदचिन्ह नहीं देख पाया। उसने सपना देखा कि भूत-प्रेत उसे गले लगा रहे थे, वह गधे पर सवार था और जहर पी रहा था, और साथ ही एक तेल से सना हुआ नंगा व्यक्ति नालदा फूलों की माला पहने हुए था। ऐसे कई और अपशगुन सपने में और जागते हुए देखकर कंस अपनी मृत्यु से भयभीत हो गया और चिंता के कारण वह सो नहीं पाया।   |   bhagavat अध्याय 10.42: यज्ञ के धनुष का टूटना   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 42: यज्ञ के धनुष का टूटना  »  श्लोक 28-31
 
 
श्लोक  10.42.28-31 
अदर्शनं स्वशिरस: प्रतिरूपे च सत्यपि ।
असत्यपि द्वितीये च द्वैरूप्यं ज्योतिषां तथा ॥ २८ ॥
छिद्रप्रतीतिश्छायायां प्राणघोषानुपश्रुति: ।
स्वर्णप्रतीतिर्वृक्षेषु स्वपदानामदर्शनम् ॥ २९ ॥
स्वप्ने प्रेतपरिष्वङ्ग: खरयानं विषादनम् ।
यायान्नलदमाल्येकस्तैलाभ्यक्तो दिगम्बर: ॥ ३० ॥
अन्यानि चेत्थं भूतानि स्वप्नजागरितानि च ।
पश्यन् मरणसन्त्रस्तो निद्रां लेभे न चिन्तया ॥ ३१ ॥
 
 
अनुवाद
जब उसने अपनी परछाईं देखी तो उसमें वो अपना सिर नहीं देख पाया; किसी कारण चांद और तारे दुगुने दिखने लगे; उसे अपनी परछाई में एक छेद दिखा; उसे अपनी जान की आवाज सुनाई नहीं दी; पेड़ सुनहरे रंग से ढके हुए दिखे; और वह अपने पदचिन्ह नहीं देख पाया। उसने सपना देखा कि भूत-प्रेत उसे गले लगा रहे थे, वह गधे पर सवार था और जहर पी रहा था, और साथ ही एक तेल से सना हुआ नंगा व्यक्ति नालदा फूलों की माला पहने हुए था। ऐसे कई और अपशगुन सपने में और जागते हुए देखकर कंस अपनी मृत्यु से भयभीत हो गया और चिंता के कारण वह सो नहीं पाया।
 
When he saw his reflection, he could not see his head in it, the moon and stars appeared double for no reason; he saw holes in his reflection, he could not hear the sound of his breath, the trees appeared to be covered in golden light and he could not see his footprints. He saw in his dreams that ghosts and spirits were embracing him, he was riding a donkey and drinking poison. Not only this, a naked man wearing a garland of Nalad (adhul) flowers and smeared with oil was passing by. Seeing these and other such bad omens in his dreams and while awake, Kansa was afraid of the possibility of his death and could not sleep due to worry.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)