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श्रीमद् भागवतम
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स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ
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अध्याय 42: यज्ञ के धनुष का टूटना
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श्लोक 23
श्लोक
10.42.23
तयोर्विचरतो: स्वैरमादित्योऽस्तमुपेयिवान् ।
कृष्णरामौ वृतौ गोपै: पुराच्छकटमीयतु: ॥ २३ ॥
अनुवाद
जब वे इच्छानुसार घूम रहे थे, तब सूर्य अस्त होने लगा था। अतः वे ग्वालबालों के साथ नगर छोड़कर ग्वालों के बैलगाड़ी वाले शिविर में लौट आये।
While he was wandering as per his wish, the sun started setting, so he left the city with the cowherd boys and returned to their bullock cart camp.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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