श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती यह भी बताते हैं कि जिन भक्तों में ईश्वर के लिए शुद्ध प्रेम होता है, वे आमतौर पर मृत्यु का लक्षण नहीं दिखाते हैं, क्योंकि यह कृष्ण के संबंध में अशुभ है। यद्यपि, वे अन्य नौ लक्षणों को प्रकट करते हैं, जो अंततः परमानंद में स्तब्ध होकर समाप्त होते हैं।
