तावद् व्रजौकसस्तत्र नन्दगोपादयोऽग्रत: ।
पुरोपवनमासाद्य प्रतीक्षन्तोऽवतस्थिरे ॥ ८ ॥
अनुवाद
नंद महाराज और वृंदावन के अन्य निवासी, रथ से पहले ही मथुरा पहुँच गए थे और कृष्ण और बलराम की प्रतीक्षा करने के लिए नगर के बाहर के बगीचे में रुक गए थे।
Nanda Maharaja and the other residents of Vrindavana had reached Mathura before the chariot and were waiting in the garden outside the city to arrive and receive Krishna and Balarama.
तात्पर्य
नंद और अन्य लोग मथुरा पहले पहुँच गए क्योंकि कृष्ण और बलराम को ले जाने वाला रथ अक्रूर के स्नान करने की वजह से विलंब हो गया था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥