Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 10.41.48: कृपया हे मेरे स्वामी! मुझे वह कार्य करने का आदेश दीजिए जो आपकी इच्छा हो। आपकी किसी भी सेवा के काम में लगाए जाना किसी भी व्यक्ति के लिए एक बड़े भाग्य की बात होती है।   |   bhagavat अध्याय 10.41: कृष्ण तथा बलराम का मथुरा में प्रवेश   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 41: कृष्ण तथा बलराम का मथुरा में प्रवेश  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  10.41.48 
तावाज्ञापयतं भृत्यं किमहं करवाणि वाम् ।
पुंसोऽत्यनुग्रहो ह्येष भवद्भ‍िर्यन्नियुज्यते ॥ ४८ ॥
 
 
अनुवाद
कृपया हे मेरे स्वामी! मुझे वह कार्य करने का आदेश दीजिए जो आपकी इच्छा हो। आपकी किसी भी सेवा के काम में लगाए जाना किसी भी व्यक्ति के लिए एक बड़े भाग्य की बात होती है।
 
Please command this servant of yours to do whatever you want. It is a great blessing for anyone to be engaged in any service of yours.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)