Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.41.47: क्योंकि आप संपूर्ण ब्रह्मांड के शुभचिंतक मित्र और परम आत्मा हैं, इसलिए आप सभी को निष्पक्ष दृष्टि से देखते हैं। इस कारण, यद्यपि आप अपने भक्तों की प्रेमपूर्ण पूजा का आदान-प्रदान करते हैं, फिर भी आप सभी जीवों के प्रति समान रूप से भाव रखते हैं। | bhagavat अध्याय 10.41: कृष्ण तथा बलराम का मथुरा में प्रवेश । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न हि वां विषमा दृष्टि: सुहृदोर्जगदात्मनो: ।
समयो: सर्वभूतेषु भजन्तं भजतोरपि ॥ ४७ ॥
अनुवाद
क्योंकि आप संपूर्ण ब्रह्मांड के शुभचिंतक मित्र और परम आत्मा हैं, इसलिए आप सभी को निष्पक्ष दृष्टि से देखते हैं। इस कारण, यद्यपि आप अपने भक्तों की प्रेमपूर्ण पूजा का आदान-प्रदान करते हैं, फिर भी आप सभी जीवों के प्रति समान रूप से भाव रखते हैं।
Because You are the well-wishing friend and the Supreme Being of the entire universe, You look at everyone with an impartial eye. Therefore, although You exchange loving worship with Your devotees, You always treat all beings with equal respect.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥