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श्रीअक्रूर उवाच
अद्भुतानीह यावन्ति भूमौ वियति वा जले ।
त्वयि विश्वात्मके तानि किं मेऽदृष्टं विपश्यत: ॥ ४ ॥
अनुवाद
श्री अक्रूर ने कहा: पृथ्वी, आकाश या जल में जो भी अद्भुत चीजें हैं, वे सभी आपमें हैं। चूँकि आप हर चीज में व्याप्त हैं, तो जब मैं आपका दर्शन कर रहा हूँ, तो फिर वह कौन सी चीज है, जिसे मैंने नहीं देखा है?
Sri Akrura said: Whatever wonderful things are there on earth, in the sky or in the water, they all exist in you. Since you are filled with everything, when I am seeing you, then what is that thing which I have not seen?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥