Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 10.41.11: श्री अक्रूर ने कहा: हे स्वामी, मैं आप दोनों के बिना मथुरा में प्रवेश नहीं करूंगा। हे प्रभु, मैं आपका भक्त हूँ अत: यह उचित नहीं होगा कि आप मेरा परित्याग कर दें क्योंकि आप अपने भक्तों के प्रति सदैव स्नेही रहते हैं।   |   bhagavat अध्याय 10.41: कृष्ण तथा बलराम का मथुरा में प्रवेश   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 41: कृष्ण तथा बलराम का मथुरा में प्रवेश  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  10.41.11 
श्रीअक्रूर उवाच
नाहं भवद्‌भ्यां रहित: प्रवेक्ष्ये मथुरां प्रभो ।
त्यक्तुं नार्हसि मां नाथ भक्तं ते भक्तवत्सल ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
श्री अक्रूर ने कहा: हे स्वामी, मैं आप दोनों के बिना मथुरा में प्रवेश नहीं करूंगा। हे प्रभु, मैं आपका भक्त हूँ अत: यह उचित नहीं होगा कि आप मेरा परित्याग कर दें क्योंकि आप अपने भक्तों के प्रति सदैव स्नेही रहते हैं।
 
Shri Akrura said: O Lord, I will not enter Mathura without both of you. O Nath, I am your devotee, hence it would not be right for you to abandon me because you are always affectionate towards your devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)