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bhagavat 10.40.21: साध्वतों के स्वामी आपको साष्टांग प्रणाम। वासुदेव, संकर्षण, प्रद्युम्न और अनिरुद्ध के रूपों को अभिवादन।   |   bhagavat अध्याय 10.40: अक्रूर द्वारा स्तुति   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 40: अक्रूर द्वारा स्तुति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  10.40.21 
नमस्ते वासुदेवाय नम: सङ्कर्षणाय च ।
प्रद्युम्नायनिरुद्धाय सात्वतां पतये नम: ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
साध्वतों के स्वामी आपको साष्टांग प्रणाम। वासुदेव, संकर्षण, प्रद्युम्न और अनिरुद्ध के रूपों को अभिवादन।
 
Salutations to you, the Lord of the Satvatas. Salutations to your forms of Vasudeva, Sankarshana, Pradyumna and Aniruddha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)