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bhagavat 10.40.19: अपने भक्तों के डर को दूर करने वाले अद्भुत सिंह (भगवान नृसिंह) और तीनों लोकों को नापने वाले वामन को मैं प्रणाम करता हूँ।   |   bhagavat अध्याय 10.40: अक्रूर द्वारा स्तुति   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 40: अक्रूर द्वारा स्तुति  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  10.40.19 
नमस्तेऽद्भ‍ुतसिंहाय साधुलोकभयापह ।
वामनाय नमस्तुभ्यं क्रान्तत्रिभुवनाय च ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
अपने भक्तों के डर को दूर करने वाले अद्भुत सिंह (भगवान नृसिंह) और तीनों लोकों को नापने वाले वामन को मैं प्रणाम करता हूँ।
 
I salute you, O wonderful lion (Lord Narasimha) who drives away the fear of his saint-devotees, and O Vaman, who measures the three worlds with his steps.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)