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bhagavat 10.40.11: आपकी भौतिक प्रकृति में स्थित सतो, रजो और तमो गुण ब्रह्मा से लेकर निष्क्रिय प्राणियों तक सभी सशर्त जीवों को उलझाए रखते हैं।   |   bhagavat अध्याय 10.40: अक्रूर द्वारा स्तुति   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 40: अक्रूर द्वारा स्तुति  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  10.40.11 
सत्त्वं रजस्तम इति भवत: प्रकृतेर्गुणा: ।
तेषु हि प्राकृता: प्रोता आब्रह्मस्थावरादय: ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
आपकी भौतिक प्रकृति में स्थित सतो, रजो और तमो गुण ब्रह्मा से लेकर निष्क्रिय प्राणियों तक सभी सशर्त जीवों को उलझाए रखते हैं।
 
The modes of goodness, passion and ignorance of Your physical nature confine all conditioned souls, from Brahma to the immovable beings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)