श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 4: राजा कंस के अत्याचार  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  10.4.6 
नन्वहं ते ह्यवरजा दीना हतसुता प्रभो ।
दातुमर्हसि मन्दाया अङ्गेमां चरमां प्रजाम् ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
हे स्वामी, हे मेरे भाई, मैं अपनी सभी संतानों से वंचित होकर बहुत ही निर्धन हूँ, फिर भी मैं तुम्हारी छोटी बहन हूँ इसलिए यह तुम्हारे लिए उचित होगा कि तुम मुझे यह आखिरी शिशु उपहार स्वरूप दे दो।
 
हे स्वामी, हे मेरे भाई, मैं अपनी सभी संतानों से वंचित होकर बहुत ही निर्धन हूँ, फिर भी मैं तुम्हारी छोटी बहन हूँ इसलिए यह तुम्हारे लिए उचित होगा कि तुम मुझे यह आखिरी शिशु उपहार स्वरूप दे दो।
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas