भाग्य द्वारा नियत कुछ भी नहीं होता है।
तस्यैव हेतोः प्रयतेत कोविदो
ना लभ्यते यद् भ्रमतम उपरि अधः
तद् लभ्यते दुःखवदन्यतः सुखं
कालेन सर्वत्र गभीर-रमहास
(भाग. 1.5.18)
देवकी अच्छी तरह से जानती थी कि क्योंकि उसके कई बच्चों की हत्या भाग्य द्वारा तय की गई थी, इसलिए कंस को दोष नहीं दिया जाना चाहिए। कंस को अच्छे निर्देश देने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उपदेशो हि मूर्खणाम् प्रकोपाय न शांत्ये (चाणक्य पंडित)। यदि किसी मूर्ख व्यक्ति को अच्छे निर्देश दिए जाते हैं, तो वह अधिक क्रोधी हो जाता है। इसके अलावा, एक क्रूर व्यक्ति सांप से भी ज्यादा खतरनाक होता है। एक सांप और एक क्रूर व्यक्ति दोनों क्रूर होते हैं, लेकिन एक क्रूर व्यक्ति अधिक खतरनाक होता है क्योंकि यद्यपि एक सांप को मंत्रों द्वारा मोहित किया जा सकता है या जड़ी-बूटियों द्वारा वश में किया जा सकता है, एक क्रूर व्यक्ति को किसी भी तरह से वश में नहीं किया जा सकता है। कंस का यही स्वभाव था।
