श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 4: राजा कंस के अत्याचार  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  10.4.46 
आयु: श्रियं यशो धर्मं लोकानाशिष एव च ।
हन्ति श्रेयांसि सर्वाणि पुंसो महदतिक्रम: ॥ ४६ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन, जब कोई व्यक्ति महापुरुषों पर अत्याचार करता है, तो उसकी दीर्घायु, सुंदरता, यश, धर्म, आशीर्वाद और उच्च लोकों में जाने के सारे वर नष्ट हो जाते हैं।
 
हे राजन, जब कोई व्यक्ति महापुरुषों पर अत्याचार करता है, तो उसकी दीर्घायु, सुंदरता, यश, धर्म, आशीर्वाद और उच्च लोकों में जाने के सारे वर नष्ट हो जाते हैं।
 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध दस के अंतर्गत चौथा अध्याय समाप्त होता है ।
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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