श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 4: राजा कंस के अत्याचार  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  10.4.45 
ते वै रज:प्रकृतयस्तमसा मूढचेतस: ।
सतां विद्वेषमाचेरुरारादागतमृत्यव: ॥ ४५ ॥
 
 
अनुवाद
राग और अंधकार के गुणों से भरे हुए और अपने भले-बुरे का ज्ञान न होने के कारण वे असुर, जिनकी मौत उनके सिर पर मंडरा रही थी, संतों को सताना शुरू कर दिया।
 
राग और अंधकार के गुणों से भरे हुए और अपने भले-बुरे का ज्ञान न होने के कारण वे असुर, जिनकी मौत उनके सिर पर मंडरा रही थी, संतों को सताना शुरू कर दिया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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