श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 4: राजा कंस के अत्याचार  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  10.4.43 
श्रीशुक उवाच
एवं दुर्मन्त्रिभि: कंस: सह सम्मन्‍त्र्य दुर्मति: ।
ब्रह्महिंसां हितं मेने कालपाशावृतोऽसुर: ॥ ४३ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: इस प्रकार अपने दुष्ट मंत्रियों की सलाह पर विचार करके यमराज के नियमों से बाध्य तथा राक्षस होने के कारण बुद्धिहीन कंस ने अपना सौभाग्य प्राप्त करने के उद्देश्य से साधु-पुरुषों और ब्राह्मणों पर अत्याचार करने का निर्णय लिया।
 
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: इस प्रकार अपने दुष्ट मंत्रियों की सलाह पर विचार करके यमराज के नियमों से बाध्य तथा राक्षस होने के कारण बुद्धिहीन कंस ने अपना सौभाग्य प्राप्त करने के उद्देश्य से साधु-पुरुषों और ब्राह्मणों पर अत्याचार करने का निर्णय लिया।
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas