नमो ब्रह्मण्य देवाय
गो ब्राह्मण हित्ताय च
जगत धिताय कृष्णाय
गोविंदाय नमो नमः
जब कृष्ण सामाजिक व्यवस्था में सच्ची सिद्धि प्राप्त करने आते हैं वे व्यक्तिगत रूप से गायों और ब्राह्मणों की रक्षा करते हैं (गो ब्राह्मण हित्ताय च) | यह उनकी प्रथम रुचि है क्योंकि ब्राह्मणों और गायों की रक्षा के बिना कोई मानवीय सभ्यता नहीं हो सकती और सुखी शांतिपूर्ण जीवन का सवाल ही नहीं उठता। अतः असुर हमेशा ब्राह्मणों और गायों को मारने में लगे रहते हैं। विशेष रूप से इस युग में, कलियुग में, गायों को पूरी दुनिया में मारा जा रहा है, और जैसे ही ब्राह्मण सभ्यता की स्थापना के लिए एक आंदोलन होता है, सामान्य लोग विद्रोह करते हैं। इस प्रकार वे कृष्णभावनामृत आंदोलन को "ब्रेनवाश" के रूप में देखते हैं। ऐसे ईर्ष्यालु व्यक्ति अपनी ईश्वरविहीन सभ्यता में कैसे खुश रह सकते हैं? परम भगवान व्यक्तित्व उन्हें जन्म दर जन्म अंधकार में रखकर, उन्हें धकेलते हुए और उन्हें नारकीय जीवन की दयनीय परिस्थितियों में नीचे धकेलते हुए दंडित करते हैं। कृष्ण भावनामृत आन्दोलन ने ब्राम्हण सभ्यता प्रारंभ की है, पर विशेष रूप से जब यह पाश्चात्य देशों में आरम्भ की गई, असुरों ने अनेक प्रकारों से इसे बाधा उत्पन्न करने का प्रयास किया। फिर भी, मानवीय समाज के लाभ के लिए हमें इस आंदोलन को सहनशीलतापूर्वक आगे बढ़ाना होगा।
