श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 4: राजा कंस के अत्याचार  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  10.4.37 
तथापि देवा: सापत्न्‍यान्नोपेक्ष्या इति मन्महे ।
ततस्तन्मूलखनने नियुङ्‌क्ष्वास्माननुव्रतान् ॥ ३७ ॥
 
 
अनुवाद
फिर भी, उनके वैर के कारण हमारी राय है कि देवताओं के साथ अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। अतः उन्हें पूरी तरह से उखाड़ फेंकने के लिए, हमें उनके साथ युद्ध करने में लगाइए क्योंकि हम आपका अनुसरण करने को तैयार हैं।
 
Nevertheless, we are of the view that the gods should not be treated carelessly because of their enmity. Therefore, to destroy them completely, you should engage us in a war with them as we are ready to follow you.
तात्पर्य
नीति शास्त्रों के अनुसार अग्नि को पूर्णतः न बुझाना, रोग का पूर्ण इलाज न कराना व ऋण को पूर्ण रुप से उतार न देना, ऐसा नहीं करना चाहिये। अन्यथा ये बढ़कर आगे रोकना गहन हो जाता हैं। इसलिए मंत्रियों ने कंस को यही परामर्श दिया कि शत्रुओं का पूर्ण निवारण कर देना चाहिये।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)