श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 4: राजा कंस के अत्याचार  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  10.4.34 
केचित् प्राञ्जलयो दीना न्यस्तशस्त्रा दिवौकस: ।
मुक्तकच्छशिखा: केचिद् भीता: स्म इति वादिन: ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
हार के पश्चात और सभी हथियारों से खाली होकर कुछ देवताओं ने युद्ध रोक दिया और हाथ जोड़कर आपकी प्रशंसा करने लगे और उनमें से कुछ ने खुले हुए वस्त्र व बालों के साथ आपके सामने कहा, “हे भगवान, हम आपसे बहुत डरते हैं।”
 
हार के पश्चात और सभी हथियारों से खाली होकर कुछ देवताओं ने युद्ध रोक दिया और हाथ जोड़कर आपकी प्रशंसा करने लगे और उनमें से कुछ ने खुले हुए वस्त्र व बालों के साथ आपके सामने कहा, “हे भगवान, हम आपसे बहुत डरते हैं।”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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