श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 4: राजा कंस के अत्याचार  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  10.4.27 
शोकहर्षभयद्वेषलोभमोहमदान्विता: ।
मिथो घ्नन्तं न पश्यन्ति भावैर्भावं पृथग्द‍ृश: ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
भेदभावपूर्ण दृष्टि रखने वाले लोग शोक, हर्ष, भय, द्वेष, लोभ, मोह और मद जैसे भौतिक गुणों से घिरे रहते हैं। वे उस निकट के कारण से प्रभावित होते हैं जिसका वे निवारण करने में लगे रहते हैं क्योंकि उन्हें दूरस्थ, परम कारण, ईश्वर व्यक्तित्व का कोई ज्ञान नहीं होता।
 
भेदभावपूर्ण दृष्टि रखने वाले लोग शोक, हर्ष, भय, द्वेष, लोभ, मोह और मद जैसे भौतिक गुणों से घिरे रहते हैं। वे उस निकट के कारण से प्रभावित होते हैं जिसका वे निवारण करने में लगे रहते हैं क्योंकि उन्हें दूरस्थ, परम कारण, ईश्वर व्यक्तित्व का कोई ज्ञान नहीं होता।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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