श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 4: राजा कंस के अत्याचार  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  10.4.25 
भ्रातु: समनुतप्तस्य क्षान्तरोषा च देवकी ।
व्यसृजद् वसुदेवश्च प्रहस्य तमुवाच ह ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
जब देवकी ने अपने भाई को पूर्वनिर्धारित घटनाओं के बारे में बताते हुए वास्तव में अपने किए पर पछतावा करते देखा तो उनका सारा गुस्सा दूर हो गया। वसुदेव भी क्रोध से मुक्त हो गए। उन्होंने मुस्कुराते हुए कंस से कहा।
 
When Devaki saw that her brother was genuinely repentant while explaining the predestined course of events, all her anger vanished. Similarly, Vasudeva too became free from anger. He smiled and said to Kamsa.
तात्पर्य
देवकी और वसुदेव, दोनों बहुत उच्च व्यक्तित्व वाले थे, जो कंस द्वारा प्रस्तुत सत्य को स्वीकार करते थे कि सब कुछ भाग्य द्वारा नियत है। भविष्यवाणी के अनुसार, कंस को देवकी के आठवें बच्चे द्वारा मारा जाएगा। इसलिए, वसुदेव और देवकी ने देखा कि इन सभी घटनाओं के पीछे भगवान का महान् योजना थी। क्योंकि भगवान पहले ही एक मानव बच्चे की तरह जन्म ले चुके थे, और वह यशोदा की सुरक्षित हिरासत में थे, इसलिए सब कुछ योजना के अनुसार हो रहा था, और कंस के प्रति उनकी गलत भावना को जारी रखने की कोई ज़रूरत नहीं थी। इस प्रकार उन्होंने कंस के शब्दों को स्वीकार कर लिया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)