श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 4: राजा कंस के अत्याचार  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  10.4.21 
तस्माद् भद्रे स्वतनयान् मया व्यापादितानपि ।
मानुशोच यत: सर्व: स्वकृतं विन्दतेऽवश: ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
मेरी प्यारी बहन देवकी, तुम्हें सदा सुखी रहना। हर व्यक्ति अपने कर्मों का फल भोगता है, जो प्रारब्ध के अधीन होता है। इसलिए, दुर्भाग्यवश मेरे द्वारा मारे गए अपने पुत्रों के लिए शोक मत करो।
 
मेरी प्यारी बहन देवकी, तुम्हें सदा सुखी रहना। हर व्यक्ति अपने कर्मों का फल भोगता है, जो प्रारब्ध के अधीन होता है। इसलिए, दुर्भाग्यवश मेरे द्वारा मारे गए अपने पुत्रों के लिए शोक मत करो।
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas