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श्लोक 10.4.18  |
मा शोचतं महाभागावात्मजान् स्वकृतंभुज: ।
जान्तवो न सदैकत्र दैवाधीनास्तदासते ॥ १८ ॥ |
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| अनुवाद |
| हे महान् आत्माओ, तुम दोनों के बेटों को अपने दुर्भाग्य का ही फल भोगना पड़ा है। इसीलिए उनके लिए शोक मत करो। सारे जीव ईश्वर के नियंत्रण में होते हैं और वे हमेशा एक साथ नहीं रह सकते। |
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| हे महान् आत्माओ, तुम दोनों के बेटों को अपने दुर्भाग्य का ही फल भोगना पड़ा है। इसीलिए उनके लिए शोक मत करो। सारे जीव ईश्वर के नियंत्रण में होते हैं और वे हमेशा एक साथ नहीं रह सकते। |
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