श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 4: राजा कंस के अत्याचार  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  10.4.18 
मा शोचतं महाभागावात्मजान् स्वकृतंभुज: ।
जान्तवो न सदैकत्र दैवाधीनास्तदासते ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
हे महान् आत्माओ, तुम दोनों के बेटों को अपने दुर्भाग्य का ही फल भोगना पड़ा है। इसीलिए उनके लिए शोक मत करो। सारे जीव ईश्वर के नियंत्रण में होते हैं और वे हमेशा एक साथ नहीं रह सकते।
 
O great souls, your sons have had to suffer the consequences of their own misfortunes. Therefore, do not grieve for them. All beings are under the control of God and they cannot live together forever.
तात्पर्य
कंस ने अपनी बहन और बहनोई को महाभागव क्योंकि भले ही उन्होंने उनके आम बच्चों को मार डाला था, लेकिन देवी दुर्गा ने उनसे जन्म लिया था। क्योंकि देवकी ने दुर्गा देवी को अपने गर्भ में धारण किया था, कंस ने देवकी और उसके पति दोनों की प्रशंसा की। असुर देवी दुर्गा, काली आदि के प्रति बहुत भक्त होते हैं। इसलिए, कंस, वास्तव में चकित होकर, अपनी बहन और बहनोई की महान स्थिति की सराहना करते थे। दुर्गा निश्चित रूप से प्रकृति के नियमों के अधीन नहीं है, क्योंकि वह स्वयं प्रकृति के नियमों की नियंत्रक है। हालाँकि, साधारण जीव इन कानूनों द्वारा नियंत्रित होते हैं (प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः)। नतीजतन, हममें से किसी को भी लंबे समय तक एक साथ रहने की अनुमति नहीं है। इस तरह से बोलकर, कंस ने अपनी बहन और बहनोई को शांत करने की कोशिश की।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)