श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 4: राजा कंस के अत्याचार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  10.4.15 
अहो भगिन्यहो भाम मया वां बत पाप्मना ।
पुरुषाद इवापत्यं बहवो हिंसिता: सुता: ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
अरे मेरी बहन! अरे मेरे बहनोई! मैं सचमुच उस मानवभक्षी राक्षस के समान पापी हूँ जो अपना शिशु को मारकर खा जाता है, क्योंकि मैंने तुमसे उत्पन्न बहुत से पुत्रों को मार डाला है।
 
Alas my sister! Alas my brother-in-law! Truly I am as sinful as that man-eater (demon) who kills and eats his own child, for I have killed many sons born to you.
तात्पर्य
राक्षसों की यह आदत मानी जाती है कि वे अपने पुत्रों को खा जाते हैं, जैसा कुछ साँप और अन्य पशु कभी-कभी करते हैं। वर्तमान कलियुग में राक्षस पिता और माता अपने ही बच्चों की गर्भ में हत्या कर रहे हैं तथा कुछ तो भ्रूण को बड़े चाव से खा भी जाते हैं। इस प्रकार तथा कथित सभ्यता धीरे-धीरे राक्षसों को उत्पन्न करके आगे बढ़ती जा रही है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)