श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 4: राजा कंस के अत्याचार  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  10.4.14 
तयाभिहितमाकर्ण्य कंस: परमविस्मित: ।
देवकीं वसुदेवं च विमुच्य प्रश्रितोऽब्रवीत् ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
देवी दुर्गा के वचन सुनकर कंस अत्यधिक आश्चर्यचकित हुआ। तब वह अपनी बहन देवकी और बहनोई वसुदेव के पास गया, उन्हें बेड़ियों से मुक्त कर दिया और अत्यंत विनम्र भाव में इस प्रकार बोला।
 
देवी दुर्गा के वचन सुनकर कंस अत्यधिक आश्चर्यचकित हुआ। तब वह अपनी बहन देवकी और बहनोई वसुदेव के पास गया, उन्हें बेड़ियों से मुक्त कर दिया और अत्यंत विनम्र भाव में इस प्रकार बोला।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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