श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 4: राजा कंस के अत्याचार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  10.4.1 
श्रीशुक उवाच
बहिरन्त:पुरद्वार: सर्वा: पूर्ववदावृता: ।
ततो बालध्वनिं श्रुत्वा गृहपाला: समुत्थिता: ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
श्रीशुकदेव गोस्वामी ने कहा: हे राजन परीक्षित, घर के भीतरी व बाहर के दरवाज़े पहले की तरह ही बन्द हो गये। तत्पश्चात् घर के वासी, खास तौर पर पहरेदारों ने, नवजात शिशु का रोना सुना और अपने बिस्तरों से उठ खड़े हुए।
 
श्रीशुकदेव गोस्वामी ने कहा: हे राजन परीक्षित, घर के भीतरी व बाहर के दरवाज़े पहले की तरह ही बन्द हो गये। तत्पश्चात् घर के वासी, खास तौर पर पहरेदारों ने, नवजात शिशु का रोना सुना और अपने बिस्तरों से उठ खड़े हुए।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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