श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 39: अक्रूर द्वारा दर्शन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  10.39.9 
यत्सन्देशो यदर्थं वा दूत: सम्प्रेषित: स्वयम् ।
यदुक्तं नारदेनास्य स्वजन्मानकदुन्दुभे: ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
अक्रूर ने वह सन्देश सुनाया जिसे पहुँचाने के लिए उन्हें भेजा गया था। उन्होंने कंस के असली इरादों को भी बताया और (यह भी बताया) कि कैसे नारद ने कंस को सूचना दी थी कि कृष्ण ने वसुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लिया है।
 
अक्रूर ने वह सन्देश सुनाया जिसे पहुँचाने के लिए उन्हें भेजा गया था। उन्होंने कंस के असली इरादों को भी बताया और (यह भी बताया) कि कैसे नारद ने कंस को सूचना दी थी कि कृष्ण ने वसुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लिया है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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