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श्लोक 10.39.8  |
श्रीशुक उवाच
पृष्टो भगवता सर्वं वर्णयामास माधव: ।
वैरानुबन्धं यदुषु वसुदेववधोद्यमम् ॥ ८ ॥ |
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| अनुवाद |
| शुकदेव गोस्वामी जी ने कहा : भगवान् जी के पूछने पर मधुवंशी अक्रूर ने सारी परिस्थिति कह सुनाई जिसमें यदुओं के प्रति कंस की शत्रुता और उसके द्वारा वसुदेव के वध की कोशिश शामिल थी। |
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| शुकदेव गोस्वामी जी ने कहा : भगवान् जी के पूछने पर मधुवंशी अक्रूर ने सारी परिस्थिति कह सुनाई जिसमें यदुओं के प्रति कंस की शत्रुता और उसके द्वारा वसुदेव के वध की कोशिश शामिल थी। |
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