श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 39: अक्रूर द्वारा दर्शन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  10.39.7 
दिष्ट्याद्य दर्शनं स्वानां मह्यं व: सौम्य काङ्‌क्षितम् ।
सञ्जातं वर्ण्यतां तात तवागमनकारणम् ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
हे प्रिय स्वजन, आपके दर्शन करने की हमारी इच्छा आज सौभाग्यवश पूरी हुई है। हे दयालु चाचा, कृपया यह बताइए कि आप यहाँ आने का कष्ट क्यों किया है?
 
हे प्रिय स्वजन, आपके दर्शन करने की हमारी इच्छा आज सौभाग्यवश पूरी हुई है। हे दयालु चाचा, कृपया यह बताइए कि आप यहाँ आने का कष्ट क्यों किया है?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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