श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 39: अक्रूर द्वारा दर्शन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  10.39.6 
अहो अस्मदभूद् भूरि पित्रोर्वृजिनमार्ययो: ।
यद्धेतो: पुत्रमरणं यद्धेतोर्बन्धनं तयो: ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
बस यह देखिए कि मैंने अपने निर्दोष माता-पिता के लिए कितना दुख उत्पन्न कर दिया है! मेरे ही कारण उनके बहुत से पुत्र मारे गए और वे खुद बंदी हैं।
 
बस यह देखिए कि मैंने अपने निर्दोष माता-पिता के लिए कितना दुख उत्पन्न कर दिया है! मेरे ही कारण उनके बहुत से पुत्र मारे गए और वे खुद बंदी हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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