Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.39.56-57: ज्यों ही महाभक्त अक्रूर ने यह दृश्य देखा, वे अत्यन्त प्रसन्न हो गये और उनमें दिव्य शक्ति का संचार हो गया। तीव्र आनन्द के कारण उनके शरीर के रोएँ खड़े हो गये और आँखों से आँसू बह निकले, जिससे उनका सारा शरीर भीग गया। किसी तरह अपने को सम्भालते हुए अक्रूर ने पृथ्वी पर अपना सर रखा। तत्पश्चात् सम्मानपूर्वक हाथ जोड़े और भावविभोर वाणी से अत्यन्त धीमे-धीमे और ध्यानपूर्वक भगवान की स्तुति करने लगे। | bhagavat अध्याय 10.39: अक्रूर द्वारा दर्शन । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ज्यों ही महाभक्त अक्रूर ने यह दृश्य देखा, वे अत्यन्त प्रसन्न हो गये और उनमें दिव्य शक्ति का संचार हो गया। तीव्र आनन्द के कारण उनके शरीर के रोएँ खड़े हो गये और आँखों से आँसू बह निकले, जिससे उनका सारा शरीर भीग गया। किसी तरह अपने को सम्भालते हुए अक्रूर ने पृथ्वी पर अपना सर रखा। तत्पश्चात् सम्मानपूर्वक हाथ जोड़े और भावविभोर वाणी से अत्यन्त धीमे-धीमे और ध्यानपूर्वक भगवान की स्तुति करने लगे।
As soon as Mahabhagwat Akrura saw this scene, he became very happy and divine power arose in him. He was thrilled with intense joy and tears started flowing from his eyes which drenched his whole body. Somehow controlling himself, Akrura bowed his head on the ground. Then he folded his hands in respect and started praising the Lord very slowly and attentively with emotional voice.
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध दस के अंतर्गत उनतालीसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥