श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 39: अक्रूर द्वारा दर्शन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  10.39.5 
किं नु न: कुशलं पृच्छे एधमाने कुलामये ।
कंसे मातुलनाम्नाङ्ग स्वानां नस्तत्प्रजासु च ॥ ५ ॥
 
 
अनुवाद
किन्तु हे अक्रूर, जब तक मामा कहलाने वाला हमारे परिवार का रोग राजा कंस मजबूत बना हुआ है, तब तक मैं अपने परिवार वालों और उसकी अन्य प्रजा के बारे में पूछने की कष्टदायक बातों में कैसे उलझूँ?
 
किन्तु हे अक्रूर, जब तक मामा कहलाने वाला हमारे परिवार का रोग राजा कंस मजबूत बना हुआ है, तब तक मैं अपने परिवार वालों और उसकी अन्य प्रजा के बारे में पूछने की कष्टदायक बातों में कैसे उलझूँ?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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