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bhagavat 10.39.44-45: अब अक्रूर ने वहाँ अनन्त शेष सर्पराज को देखा, जिनकी सिद्ध, चारण, गंधर्व और असुरगण अपने सिर झुकाकर प्रशंसा कर रहे थे। अक्रूर ने जिन भगवान को देखा उनके हजारों सिर, हजारों फन और हजारों मुकुट थे। उनका नीला वस्त्र और कमल के तने के तंतुओं जैसा गोरा रंग ऐसा लग रहा था मानो अनेक चोटियों वाला सफ़ेद कैलाश पर्वत हो।   |   bhagavat अध्याय 10.39: अक्रूर द्वारा दर्शन   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 39: अक्रूर द्वारा दर्शन  »  श्लोक 44-45
 
 
श्लोक  10.39.44-45 
भूयस्तत्रापि सोऽद्राक्षीत्स्तूयमानमहीश्वरम् ।
सिद्धचारणगन्धर्वैरसुरैर्नतकन्धरै: ॥ ४४ ॥
सहस्रशिरसं देवं सहस्रफणमौलिनम् ।
नीलाम्बरं विसश्वेतं श‍ृङ्गै: श्वेतमिव स्थितम् ॥ ४५ ॥
 
 
अनुवाद
अब अक्रूर ने वहाँ अनन्त शेष सर्पराज को देखा, जिनकी सिद्ध, चारण, गंधर्व और असुरगण अपने सिर झुकाकर प्रशंसा कर रहे थे। अक्रूर ने जिन भगवान को देखा उनके हजारों सिर, हजारों फन और हजारों मुकुट थे। उनका नीला वस्त्र और कमल के तने के तंतुओं जैसा गोरा रंग ऐसा लग रहा था मानो अनेक चोटियों वाला सफ़ेद कैलाश पर्वत हो।
 
Now Akrur saw the serpent king Ananta Shesh there, whose praises were being bowed by Siddhas, Charanas, Gandharvas and demons. The God whom Akrur saw had thousands of heads, thousands of hoods and thousands of crowns. His blue clothes and fair complexion, as white as the fibres of a lotus stem, looked as if it were the white Kailash mountain with many peaks.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)