श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 39: अक्रूर द्वारा दर्शन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  10.39.4 
श्रीभगवानुवाच
तात सौम्यागत: कच्च्त्स्विगतं भद्रमस्तु व: ।
अपि स्वज्ञातिबन्धूनामनमीवमनामयम् ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा: हे भद्र पुरुष, प्रिय चाचा अक्रूर, यहाँ की आपकी यात्रा सुखद रही? आपके साथ सबकुछ कल्याणकारी हो। हमारे मित्र और हमारे निकट एवं दूर के सुहृद जो हमारी भलाई चाहते हैं, वे सभी सुखी और स्वस्थ हैं ना?
 
भगवान ने कहा: हे भद्र पुरुष, प्रिय चाचा अक्रूर, यहाँ की आपकी यात्रा सुखद रही? आपके साथ सबकुछ कल्याणकारी हो। हमारे मित्र और हमारे निकट एवं दूर के सुहृद जो हमारी भलाई चाहते हैं, वे सभी सुखी और स्वस्थ हैं ना?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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