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श्लोक 10.39.3  |
सायन्तनाशनं कृत्वा भगवान् देवकीसुत: ।
सुहृत्सु वृत्तं कंसस्य पप्रच्छान्यच्चिकीर्षितम् ॥ ३ ॥ |
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| अनुवाद |
| संध्या के भोजन के पश्चात, देवकीपुत्र भगवान कृष्ण ने अक्रूर से प्रश्न किया कि कंस अपने प्रिय कुटुंबियों एवं मित्रों के साथ कैसा व्यवहार कर रहा है और राजा क्या योजना बना रहा है। |
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| संध्या के भोजन के पश्चात, देवकीपुत्र भगवान कृष्ण ने अक्रूर से प्रश्न किया कि कंस अपने प्रिय कुटुंबियों एवं मित्रों के साथ कैसा व्यवहार कर रहा है और राजा क्या योजना बना रहा है। |
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